मुख्यमंत्री राहत कोष बना जरूरतमंदांे के लिए आशा की एक किरण

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हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के अति गरीब व सभी ज़रुरतमन्द व्यक्तियों की सहायता करने की दिशा में ईमानदार प्रयास कर रही है। सरकार द्वारा ऐसे सभी गरीब एवं पात्र लोगों को विभिन्न विभागों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के अधीन लाया जा रहा है।

इन योजनाओं के अतिरिक्त, मुख्यमंत्री राहत कोष आपात स्थितियों में सहायता के लिये हर संभव कोशिश कर रहेे गरीब एवं बेसहारा लोगों के लिये आशा की किरण साबित हुआ है। मुख्यमंत्री राहत कोष से वित्तीय सहायता मुख्यमंत्री के विवेक पर मानवीय आधार पर प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री राहत कोष से राज्य में पिछले चार वर्षों के दौरान चिकित्सा उपचार तथा आपातकाल के दौरान खर्चों को पूरा करने के लिये 28,535 पात्र व्यक्तियों को 69,39,86,378 रुपये की राशि प्रदान की गई है। वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान इस निधि से 6,413 ज़रुरतमन्द लोगों को 13,21,24,419 रुपये की राशि वितरित की गई। वर्ष 2020-21 में 7,371 व्यक्तियों को 17,23,09,008 रुपये की वित्तीय सहायता तथा वर्ष 2021 से फरवरी, 2022 तक 7,273 व्यक्तियों को 16,03,61,600 रुपये का लाभ प्रदान किया गया है। पिछले चार वर्षों के दौरान निजी तौर पर, कंपनी निकायों तथा विभिन्न संगठनों से मानवीय प्रयोजन के लिये 46,99,13,882 रुपये की राशि अंशदान के रूप में प्राप्त हुई है।

राज्य सरकार समय-समय पर नागरिकों, कंपनियों तथा संगठनों को इस निधि में उदारतापूर्वक दान करने का आग्रह कर रही है, क्योंकि यह धनराशि अस्वस्थ एवं व्यथित गरीब लोगों को राहत पहुंचाने के लिये वितरित की जाती है, विशेषकर जब इन लोगों को सहायता का अन्य कोई साधन उपलब्ध नहीं होता। जिम्मेवार नागरिक होने के नाते हम सभी को इस निधि में अंशदान के लिये लोगों को प्रेरित करना चाहिए। निधि में केवल स्वेच्छा से योगदान किया जाता है।

इस निधि के लिये अंशदान ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ हिमाचल प्रदेश, शिमला-171002 में चेक, बैंक ड्राफ्ट, नकद अथवा हि.प्र. राज्य सहकारी बैंक के खाता संख्या 4060100315 (आईएफएससी कोड-वाईईएसबी0एचपीबी406) में इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण से किया जा सकता है। इस निधि में किया गया अंशदान आयकर अधिनियम की धारा 80-जी के अन्तर्गत पूरी तरह से आयकर मुक्त है तथा इस छूट के लिये इसका पैन नम्बर एएबीटीसी5563बी है।

इस राशि के अन्तर्गत तकनीकी अथवा व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे उत्कृष्ट गरीब विद्यार्थियों को भी राहत प्रदान की जा रही है। अनुसूचित जाति से सम्बन्ध रखने वाले विद्यार्थियों को बेशक वे पठन में उत्कृष्ट नहीं हैं, की सहायता के लिये भी मुख्यमंत्री सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकते हैं।