May 23, 2022

डीपीआर समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश

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मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां बजट 2022-23 की विधायक प्राथमिकताओं को अंतिम रूप देने के लिए दूसरे दिन के पहले सत्र में जिला कांगड़ा और किन्नौर के विधायकों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए विभिन्न मामलों के अलावा उनके बहुमूल्य सुझावों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि विधायकों को अपनी प्राथमिकताओं को प्रस्तुत करने और बजट 2022-23 के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव देने का अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने पिछले चार वर्षों के दौरान यह सुनिश्चित किया है कि राज्य के हर क्षेत्र और समाज के हर वर्ग को प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी और विकासात्मक योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने कहा कि महामारी के बावजूद राज्य सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि महामारी के शुरूआती दौर में प्रदेश में केवल दो ऑक्सीजन प्लांट थे और आज प्रदेश के विभिन्न भागों में 48 ऑक्सीजन प्लांट हैं।
जय राम ठाकुर ने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग धन के अभाव में बेहतर स्वास्थ्य देखभाल से वंचित न रहे यह सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा कई योजनाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 4.26 लाख परिवारों का पंजीकरण किया गया है और 1.20 लाख लोगों को 145 करोड़ रुपये का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमकेयर योजना के अन्तर्गत 5.13 लाख परिवार पंजीकृत हैं और 2.20 लाख परिवारों को लगभग 200 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ प्रदान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की उज्ज्वला योजना और राज्य सरकार की गृहिणी सुविधा योजना के अन्तर्गत राज्य के 4.69 लाख से अधिक परिवारों को 141.71 करोड़ रुपये के निःशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विधायकों की प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल में विधायकों की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कुल 2,363.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार द्वारा पहले चार वर्षों के लिए 3,183.37 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।