June 25, 2022

समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है मीडिया: नरेन्द्र कुमार

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विश्व संवाद केन्द्र शिमला ने मनाया राज्य स्तरीय पत्रकार सम्मान समारोह
शिमला : मीडिया समाज में केवल सूचना पहुंचाने तक सीमित न रहे अपितु समाज को सही दिशा में सोचने के लिए भी प्रेरित करे। समाज के हित में क्या है वह भी समाज को दिया जाना चाहिए। जो बिकता है हम वही देंगे, ऐसा सोचना ठीक नहीं है। ये विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र कुमार ने नारद जयंती के अवसर पर विश्व संवाद केन्द्र शिमला द्वारा ड्रीमलैंड होटल में आयोजित राज्य स्तरीय पत्रकार सम्मान समारोह-2022 में रखे। नरेन्द्र कुमार ने नकारात्मक पत्रकारिता की जगह सकारात्मक पत्रकारिता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय पत्रकारिता का मूल सिद्धांत सकारात्मकता ही रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आद्य पत्रकार देवर्षि नारद के आदर्शों को अपनाना जरूरी है। क्योंकि उन्होंने सूचना का आदान प्रदान जन कल्याण के लिए स्थापित किया था। नरेन्द्र कुमार ने कहा कि समाज से बुराई का अंत हो समाज में व्यापक कटुता समाप्त हो और सर्वजन हिताय समाचार लिखे जायें, यही आदर्श पत्रकारिता का अन्तिम उद्देश्य होना चाहिए। नरेन्द्र कुमार ने कहा कि जब देशभर में नारद जयंती पर कार्यक्रम होने शुरू हुए तो ऐसा भी समय रहा कि देवर्षि नारद जी की छवि को एक संचार के रूप में स्वीकार नहीं किया गया था। लेकिन भारत वर्ष के कौने कौने में विश्व संवाद केन्द्रों द्वारा नारद जयंती कार्यक्रम आयोजित किए गए और धीरे-धीरे ये मिथक भी समाप्त हो गया। प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में भी संवाद के महत्व को बताया गया है। परस्पर साथ-साथ चलें, परस्पर स्नेहपूर्वक संवाद करें। संवाद जब निरंतर होता है तो सम्मान भी होता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रति कुलपति प्रो. ज्योति प्रकाश ने कहा कि देवर्षि नारद का सदैव लक्ष्य सत्य स्थापित करना तथा लोक कल्याण की भावना से संदेश संवाद व सम्पर्क सूत्र करना रहा। उन्होंने कहा कि पत्रकार वर्ग को आज देवर्षि नारद से संदेश लेकर शिक्षा भाव को आत्मसात कर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारिता के काल को स्मरण करना भी हमारा दायित्व होना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम में अनेक स्वतंत्रता सैनानियों ने पत्रकारिता को ढाल बनाकर स्वतंत्रता प्राप्त की। इसके उपरांत भारत के नवनिर्माण के दौरान आने वाली अनेक चुनौतियों के प्रति भी पत्रकार समुदाय व पत्रकारिता में अपने दायित्वों का निर्वहन किया और आपातकाल में भी दमन की नीतियों के बावजूद अनेक पीड़ाओं को सहते हुए कलम की आवाज को झुकने नहीं दिया गया था।